मच्छरदानी से बदली ज़िंदगियाँ: खुशबू ने रचा इतिहास
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Published - 05 June 2025 223 views
बिहार के मुजफ्फरपुर की एक महिला मच्छरदानी का व्यापार कर लखपति बन गईं. अब पूरे देश में उनकी चर्चा हो रही है. ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में खुशबू ने अपनी सफलता की कहानी बताई. नीति आयोग के राष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया. इस सेमिनार में पूरे बिहार से सिर्फ उन्हें ही चुना गया था. इसके बाद दूसरी महिला का चयन कोलकाता से किया गया.
मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन प्रखंड के रूपवरा पंचायत के रसूलपुर गांव की रहने वाली खुशबू अब लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं. खुशबू साल 2009 से मच्छरदानी बनाने का काम कर रही हैं. उन्हें साल 2013 में जीविका के गंगा समूह से जुड़ने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने जीविका समूह की संचालित इनक्यूबेशन फंड के जरिए से अपने व्यापार को एक नया आयाम दिया.
62 लोगों को रोजगार दे रहीं
बिहार में 150 लोगों को इस फंड का लाभ मिला है, जो अपने व्यापार को बढ़ाने में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इस फंड से मुजफ्फरपुर के 10 लोगों को लाभ मिल रहा है. इस योजना के तहत 2,67000 रुपये हर लाभार्थी को दिए गए हैं. खुशबू देवी मच्छरदानी महिला उत्पादन केंद्र के तहत 62 लोगों को रोजगार दे रही हैं और अब हर दिन सैकड़ों मच्छरदानी बनाकर अपना व्यापार कर रही हैं.
मुजफ्फरपुर जिले के छोटे से गांव से निकलकर खुशबू अब पूरे भारत में अपनी पहचान बना रही हैं. इसी कड़ी में नीति आयोग की ओर से आयोजित ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें खुशबू देवी ने सभी को अपनी सफलता की कहानी बताई. उन्होंने आधे घंटे में अपनी कहानी बताई, जिस पर खूब तालियां बजीं.
हुनर से लखपति बन गईं खुशबू
इस सेमिनार के लिए बिहार से सिर्फ उनके नाम का चयन किया गया था और दूसरी महिला कोलकाता से जुड़ी थीं. खुशबू ने अपने शुरुआती दिनों से लेकर अब तक की पूरी कहानी सुनाई. खुशबू देवी आज अपने हुनर से लखपति बन गई हैं. इसके साथ ही 62 लोगों को भी रोजगार दे रही हैं. खुशबू ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में अकेले ही मच्छरदानी का व्यवसाय शुरू किया था. इसके बाद अपने आसपास की महिलाओं को जोड़ा फिर धीरे-धीरे कई गांव की महिलाएं उनके साथ जुड़ती चली गईं और सभी को उनके जरिए रोजगार का मौका मिला.
खुशबू ने कहा कि उनका सपना है कि राज्य के सभी जिलों में उनका सेंटर हो, जिसमें हजारों महिलाएं काम करें. ताकि उनका भी उत्थान हो. खुशबू ने अधिकारियों को बताया कि पहले एक सिलाई मशीन पर अकेले मच्छरदानी सिलती थी. उस समय गांव के फेरी वालों को 30 में बेचती थी. इस बीच उन्हें जीविका से जुड़ने का अवसर मिला. जीविका समूह से उन्होंने 50000 का लोन लिया और सात सिलाई मशीन की खरीदी. इसके बाद अपने साथ कुछ महिलाओं को जोड़ा और मिलकर मच्छरदानी बनाने लगी. अब वह भारत ही नहीं बल्कि नेपाल में भी मच्छरदानी की आपूर्ति करती हैं.
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